Friday, June 5, 2020

Love sayri


 पहन के झुठी हंसी महफिलों में जाना क्या, 
उदास हैं तो उदासी में मुस्कुराना क्या, 
शराब छोड़ दी ,सिगरेट भी तोड़ दी हमने, 
तुम्हारे वास्ते अब छोड़ दें जमाना क्या
 कि जिंदगी तूने सुलूक ऐसे किए साथ मेरे 
वो तो अच्छा है कि बांधे हुए हैं हाथ मेरे  
रोज मैं लौटता हूं खुद में नदामत के साथ 
रोज मुझको कहीं फेक आते हैं जज्बात मेरे
मुझको सुनिए नजरअंदाज न कीजिए साहब
मेरे हालात से अच्छे है, ख्यालात मेरे।

 





बेवफ़ा तुम आदतन थे, और मुफ़्त इश्क बदनाम हुआ

तुम और किसी के हो बैठे, और अपना काम तमाम हुआ
गली-गली में चर्चे मेरे टूटे दिल के होते यूँ इश्क में सब कुछ खोकर के, अपना भी देखो नाम हुआ
















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