उदास हैं तो उदासी में मुस्कुराना क्या,
शराब छोड़ दी ,सिगरेट भी तोड़ दी हमने,
वो तो अच्छा है कि बांधे हुए हैं हाथ मेरे
रोज मैं लौटता हूं खुद में नदामत के साथ
रोज मुझको कहीं फेक आते हैं जज्बात मेरे
मुझको सुनिए नजरअंदाज न कीजिए साहब
मेरे हालात से अच्छे है, ख्यालात मेरे।
तुम और किसी के हो बैठे, और अपना काम तमाम हुआ
गली-गली में चर्चे मेरे टूटे दिल के होते यूँ इश्क में सब कुछ खोकर के, अपना भी देखो नाम हुआ







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